Background Image Source:Google Edited By:Talkative Words मैं चलता रहा , संग आया न मेरे वो कभी । मैंने मुड़कर देखा जिधर भी, वो दिखा न मुझे कभी ।। मैंने चाँदिनी रातो को , तारे गिनकर गुज़ार दिए । फिर समझ आया इस नादान दिल को , मैं था ही नहीं उसकी गिनती में कभी ।। मैंने अँधेरे में जल रहे , दीपक की तारीफ कर दी । दिया भी इतराकर बोला , क्या मैं जल पाता बिन मेरी बाती के भी कभी ।। एक गुलाब मेरे सामने , उसे लाकर किसी और ने दे दिया । काँटे चुभे थे कितने मेरे दिल को , ये बताया न मैंने उसे कभी ।। यूँ आसानी से भूला दिया उसने मुझे , ये सोचकर मैं रोया बहुत हूँ । सुना है उसके आँसु पोछने , मेरे यार दोस्त ही गए थे कभी ।। सब ने सुनी , ऊँची आवाज़ मेरी । मगर ,कोई ना आया उसकी तीखी बाते सुनने कभी ।। मैं क्या सुनाऊ उसे , दर्द इस दिल का अब ? उसके जाने के बाद , इस टूटे दिल को भाया न कोई कभी ।। -Talkative Words Mai chalta raha, sang aayaa na merey woh kabhi . mainey mudhkar deykha jidhar bhi, woh dikha na mujhey kabhi .. mainey chaandini...
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